आनंद नाम का एक लड़का रेलगाड़ी में साफ-सफाई करता था और उससे मिलने वाले पैसों से अपने घर का गुजारा करता था। उसके परिवार में एक बूढ़ी माँ, एक छोटी बहन और बीमार पिता थे। एक दिन गाड़ी में सीटों के नीचे सफाई करते समय उसे एक पर्स मिला। पर्स हाथ में आते ही उसके हाथ कांपने लगे। उसे लगा कि इसमें बहुत सारे पैसे होंगे। उसने झटपट पर्स उठाकर अपनी जेब में डाल लिया। वह बेसब्री से गाड़ी रुकने का इंतज़ार करने लगा ताकि देख सके कि इसमें कितने पैसे हैं। वह उन पैसों से घर के लिए राशन और पिता के लिए दवाई लेना चाहता था। स्टेशन आते ही वह उतरा और एक एकांत जगह जाकर पर्स खोला। देखते ही उसके होश उड़ गए; पर्स बिल्कुल खाली था। उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। तभी पर्स की पिछली जेब में उसे एक भगवान की तस्वीर दिखी। उस तस्वीर को देखते ही उसके भीतर एक अजीब सी हलचल हुई और उसकी आँखों से दो मोटे आँसू निकलकर तस्वीर के चरणों में जा गिरे।
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 4 • कथा P9Z1az9xErlb08tvkLkp
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