कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 4 • कथा d6mvEK0pAs7Lc6VKAD5A
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एक पंडित जी प्रतिदिन रानी को कथा सुनाने महल मे जाया करते थे । कथा के अंत में प्रतिदिन कहते कि "राम सुमर ले तो बंधन छूटे। " कुछ दिन कथा सुनने के पश्चात एक दिन पिंजरे में बंद तोता बोला - "यूं मत कहो रे पंडित झूठे। " उस समय तो पंडित जी मन मसोस कर रह गये और चुपचाप चले गये। परन्तु अब तो तोता प्रतिदिन पंडित को झूठे कह कर सम्बोधित करने लगा। पंडित जी को मन में क्रोध आता कि ये सब क्या सोचेंगे, रानी क्या सोचेगी? परेशान हो कर पंडित जी अपने गुरु जी के पास गये। गुरु जी को सब हाल बताया। गुरु जी अगले दिन पंडित जी के साथ स्वयं कथा करने गये और एकान्त मे तोते के पास जा कर पूछा तुम पंडित को झूठा क्यों कहते हो?
