कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 4 • कथा duwYEiYPFiJWizgQoMAe
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स्वामी विवेकानंद और माँ सारदा देवी के बीच 'चाकू' वाली यह घटना केवल एक साधारण किस्सा नहीं है, बल्कि यह करुणा, सेवा भाव और आत्म-नियंत्रण का सबसे बड़ा उदाहरण है। स्वामी विवेकानंद (उस समय नरेंद्रनाथ) के मन में बचपन से ही सत्य की खोज और देश के लिए कुछ करने का जज्बा था। जब उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का देहावसान हो गया, तो उनके मन में अमेरिका जाकर 'विश्व धर्म संसद' में भाग लेने और भारतीय वेदांत का संदेश फैलाने का विचार आया। लेकिन विवेकानंद एक सच्चे शिष्य थे। वे कोई भी बड़ा कदम अपनी गुरु-माता, माँ सारदा देवी की अनुमति और आशीर्वाद के बिना नहीं उठाना चाहते थे। नरेंद्र, माँ सारदा देवी के पास पहुँचे और अपनी विदेश यात्रा की इच्छा जताई।
