कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 4 • कथा fIFfVLuwy0FZrWiHBixu
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बहुत समय पहले की बात है। पुरी में भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर था, जहाँ हर दिन हजारों भक्त दर्शन के लिए आते थे। उन्हीं भक्तों में एक गरीब और बूढ़ा भक्त था, जिसका नाम माधव था। माधव की भगवान जगन्नाथ में इतनी गहरी श्रद्धा थी कि वह हर दिन, चाहे आँधी हो या तूफान, मंदिर आकर भगवान के दर्शन करता और अपने मन ही मन उनसे बातें करता। माधव इतना गरीब था कि उसके पास कभी भी भगवान को चढ़ाने के लिए कोई कीमती वस्तु नहीं होती थी। वह केवल एक मिट्टी के बर्तन में अपनी बनाई हुई थोड़ी-सी खीर ले आता था और मंदिर के बाहर बैठकर भगवान को अर्पित करने की इच्छा रखता था। वह जानता था कि उसे मंदिर के अंदर जाकर भोग लगाने की अनुमति नहीं मिलेगी, इसलिए वह बाहर ही बैठकर मन ही मन भगवान को अपनी खीर अर्पित करता और फिर उसे स्वयं प्रसाद के रूप में ग्रहण कर लेता।
