कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 39 • कथा J89nfAZqNAugmgasxNsu
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माँ शीतला और भैरव: रक्षक और सेनापति की कथा प्राचीन काल की बात है, जब पृथ्वी पर 'ज्वरासुर' नामक एक भयंकर असुर का आतंक फैल गया था। वह असुर रोगों का साक्षात स्वरूप था। उसके स्पर्श मात्र से लोगों के शरीर तपने लगते, अंगों पर दाने निकल आते और पूरी मानवता महामारी की चपेट में आ गई थी। शक्ति का प्राकट्य जब हाहाकार मच गया, तब समस्त देवगण भगवान शिव की शरण में गए। महादेव के अंश से और आदिशक्ति की कृपा से एक देवी का प्राकट्य हुआ, जिनका स्वरूप अत्यंत शीतल और ममतामयी था। उन्हें 'शीतला' कहा गया। वे नीम की पत्तियों के गहने पहने, हाथ में कलश और झाड़ू लिए गधे पर सवार होकर पृथ्वी पर उतरीं।
