कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 39 • कथा csstrbt4zHDLdj5I6xEN
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एक संत जी ने एक बिल्ली पाल रखी थी। बिल्ली इतनी समझदार थी कि रोजाना जब संत जी शाम के सत्संग में रात्रि के अन्धकार को दूर करने के लिए एक चिराग़ जलाकर उसके माथे पर रख देते थे,तब वो उस चिराग को सिर से गिरने नहीं देती थी। एकाग्रता से बैठी रहती थी। यह दृश्य देखकर सत्संगी जनों को बड़ा आश्चर्य होता परन्तु वे कहते कुछ नहीं। एक दिन एक सत्संगी ने बिल्ली की हकीकत का पता लगाने की एक बेहतरीन युक्ति खोजी।
