कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 24 • कथा 4KipBQppHrWbxDNffwxw
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यह कथा श्रीचैतन्य चरितामृत और अन्य वैष्णव ग्रंथों में वर्णित "गोपाल भोग" की एक अत्यंत सुंदर और भक्तिपूर्ण लीला है। यह घटना दर्शाती है कि भगवान केवल मंत्रों के नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम और पुकार के भूखे होते हैं। निमाई का ऐश्वर्य और 'गोपाल भोग' एक समय की बात है, एक तीर्थयात्री ब्राह्मण, जो भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप 'गोपाल' के अनन्य भक्त थे, भ्रमण करते हुए नवद्वीप में श्री जगन्नाथ मिश्र (महाप्रभु के पिता) के घर पधारे। ब्राह्मण नियम के पक्के थे; वे स्वयं भोजन बनाकर अपने इष्टदेव गोपाल जी को भोग लगाने के बाद ही कुछ ग्रहण करते थे। जगन्नाथ मिश्र और माता शची ने ब्राह्मण देव का आदर-सत्कार किया और उन्हें रसोई के लिए सामग्री दी।
