कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 24 • कथा yneX5NrVMXp41pj8QU0r
1 / 4
प्राचीन काल में देवताओं और असुरों के बीच वर्चस्व की लड़ाई निरंतर चलती रहती थी। भृगु ऋषि के पुत्र शुक्राचार्य अपनी कठिन तपस्या और 'मृत-संजीवनी' विद्या के कारण असुरों के सबसे शक्तिशाली मार्गदर्शक बने। उनके मार्गदर्शन में असुरों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। उस समय असुर राज बलि (विरोचन के पुत्र और प्रहलाद के पौत्र) का शासन था। बलि एक न्यायप्रिय लेकिन अत्यंत महत्वाकांक्षी राजा थे। जब राजा बलि ने सौ अश्वमेध यज्ञ पूर्ण करने का संकल्प लिया, तो इंद्र को अपना सिंहासन छिन जाने का भय सताने लगा। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने 'वामन' (एक बौने ब्राह्मण) का अवतार लिया। वामन देव बलि की यज्ञशाला में पहुँचे। उनकी कांति और तेज को देखकर राजा बलि अत्यंत प्रभावित हुए और उनसे कुछ मांगने का आग्रह किया।
