कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 25 • कथा UuF4W6jCUWhjsCmErtA8
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वृंदावन धाम केवल ईंट–पत्थरों से बना नगर नहीं, यह प्रेम, भक्ति और सेवा की जीवित भावना है। इसी पावन धरा पर एक ऐसी महान भक्त का जीवन खिला, जिनका नाम आज भी श्रद्धा और आदर से लिया जाता है—नथिया बाई। उनका संपूर्ण जीवन श्री बाँके बिहारी जी की भक्ति और संत सेवा को समर्पित रहा। नथिया बाई अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं। विवाह के कुछ ही समय बाद उनके जीवन से पति का साया उठ गया। यह पीड़ा अभी शांत भी नहीं हुई थी कि उनके प्रिय भाई का भी देहांत हो गया। एक के बाद एक आए इन दुःखों ने उनके जीवन को कठिन बना दिया, किंतु उनके हृदय में बसे ठाकुर जी के प्रति प्रेम को कभी डिगा नहीं सके। नथिया बाई का मन संतों की सेवा में रम गया था।
