कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 25 • कथा sevuIv5d60taPZDsjZrf
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जब भगवान राम अपने मानवीय स्वरूप को त्यागकर पुनः विष्णु रूप में समाहित होने के लिए सरयू नदी की ओर बढ़ रहे थे, तब अयोध्या का हर प्राणी उनके साथ जाने को व्याकुल था। यहाँ हनुमान जी और श्री राम के बीच हुए उस अंतिम संवाद और उसके बाद की स्थिति का वर्णन है: 1. हनुमान की व्याकुलता और राम का आदेश जब हनुमान जी पाताल लोक से अंगूठी लेकर लौटे, तो उन्होंने देखा कि माता सीता पहले ही धरती में समा चुकी हैं और लक्ष्मण जी शेषनाग रूप में वैकुंठ जा चुके हैं। हनुमान जी अत्यंत दुखी होकर प्रभु राम के चरणों में गिर पड़े और बोले, "प्रभु, मुझे भी अपने साथ ले चलिए। आपके बिना इस संसार में मेरे जीवन का क्या अर्थ? " भगवान राम ने मुस्कुराते हुए हनुमान को गले लगाया और कहा:
