पंजुरली दैव की उत्पत्ति – एक दिव्य कथा प्राचीन काल की बात है, जब कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती अपने दिव्य लोक में निवास करते थे। कैलाश केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि एक जीवित स्वर्ग था—जहाँ हर ओर हरियाली, दिव्य पुष्प, सुगंधित वायु और अद्भुत शांति व्याप्त थी। माता पार्वती को प्रकृति और जीव-जंतुओं से विशेष प्रेम था। वे हर प्राणी को अपने बच्चों की तरह स्नेह देती थीं। एक दिन, उन्हें वन में एक छोटा-सा जंगली सूअर का बच्चा मिला—भोला, चंचल और मासूम। उसकी आँखों में एक अजीब-सी मासूमियत थी, जिसने माता का हृदय पिघला दिया। माता ने उसे अपने साथ कैलाश ले आईं और उसका नाम रखा—“पंजुरली”। पंजुरली धीरे-धीरे बड़ा होने लगा। वह बहुत शरारती था—कभी फूलों के बगीचे में दौड़ता, कभी जलधारा में कूद जाता, तो कभी पेड़ों को उखाड़ने की कोशिश करता। माता पार्वती उसकी हर शरारत पर मुस्कुरा देतीं— “यह तो अभी बच्चा है, इसे क्या पता।
कथा प्रसंग 1
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