वृंदावन में एक कृष्ण दास बाबा थे , उन्होंने कहीं किसी ग्रन्थ में पढ़ लिया कि अगर कोई सेवा बिना नागा किये लगातार प्रति दिन बारह वर्ष तक करी जाए तो फिर आप जो चाहो वो मिल जाएगा। बाबा ने निश्चय किया कि मैं बारह वर्ष तक लगातार कृष्ण जी को माला पहनाऊँगा और मुझे इसका फल बस ये चाहिए कि तेरहवें वर्ष के पहले दिन ठाकुर जी मुझसे माला पहनने मेरी कुटिया पर आवें। अब बाबा रोज माला पहनाने ठाकुर जी के मंदिर जाएँ , रोज़ ठाकुर जी को याद दिलाएं कि लाला अब इतने दिन हो गए , अब इतने दिन रह गए। बारहवें वर्ष के अंतिम दिन बाबा ने ठाकुर जी को माला पहनाते हुए कहा मेरी सेवा पूर्ण हुई , अब आपको आना है कल, मैं छप्पन भोग तैयार कर के रखूँगा। अगर आपको कथा संग्रह की पोस्ट पसंद आती है तो आज ही सब्सक्राइब करें कथा संग्रह अगले दिन बाबा ने खूब सवेरे उठकर छप्पन भोग तैयार किये, कुटिया सजाई, और ठाकुर जी की राह देखने लगे, राह देखते देखते अर्धरात्रि के करीब समय हो गया, मंदिर में शयन आरती भी हो गयी।
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 17 • कथा TBl8VkvK3Gjq0fwvn2AU
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