Skip to main content
Part 1 of 4
Aa
पौराणिक कथाएँ 17
पौराणिक कथाएँ 17
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 17 • कथा vENV9U0iUeeuJv3PsxtM
1 / 4

एक बार की बात है। भक्त कुम्भनदास जी प्रतिदिन की तरह श्रीनाथजी के दर्शन के लिए मंदिर पहुँचे। उस दिन उन्होंने देखा कि श्रीनाथजी कुछ उदास से बैठे हैं—मुख लटका हुआ, मानो मन में कोई बात अटकी हो। कुम्भनदास जी ने प्रेमपूर्वक पूछा— “प्रभु! आज क्या बात है? ऐसे मुँह फुलाए क्यों बैठे हैं? ” श्रीनाथजी मुस्कुराकर बोले— “क्या बताऊँ कुम्भनदास… आज तो माखन खाने का मन बहुत कर रहा है। ” कुम्भनदास जी बोले— “तो प्रभु, बताइए माखन कहाँ से लाएँ? ” श्रीनाथजी ने कहा— “देखो कुम्भनदास, एक गोपी है जो रोज़ मेरे दर्शन को आती है और कहती है—‘प्रभु, मुझे अपनी गोपी बना लो। ’ आज उसी के घर चलेंगे। ” यह सुनकर कुम्भनदास जी थोड़े घबरा गए— “प्रभु! कोई देख लेगा तो? ” श्रीनाथजी हँसते हुए बोले— “अरे नहीं! आज उसके घर शादी है।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
1 / 4