श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय 23NIVf6ffruS6g9aIP5K
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काम्यक वन के पावन आश्रम में जब धर्मराज युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव महर्षि मार्कण्डेय तथा अन्य तपस्वी ब्राह्मणों के साथ धर्मचर्चा में लीन थे, उसी समय एक अत्यंत सुंदर लता-कुंज में महारानी द्रौपदी और भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी सत्यभामा एकांत में बैठी हुई थीं। दोनों विदुषी रानियों का परस्पर मिलन बहुत दिनों के उपरांत हुआ था। वे कुरुवंश और यदुवंश के विषय में बड़े प्रेम और आत्मीयता से बातें कर रही थीं। दोनों का हृदय एक-दूसरे के प्रति अगाध स्नेह और आदर से परिपूर्ण था।
