श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय 2kTfhZS4N6JuqAHuNzD3
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राजर्षि वृषपर्वा के आश्रम में सामान छोड़कर पाण्डव गंधमादन पर महर्षि आर्ष्टिषेण के तपोवन पहुँचे और अपने वनवास का पाँचवाँ वर्ष व्यतीत किया।

राजर्षि वृषपर्वा के आश्रम में सामान छोड़कर पाण्डव गंधमादन पर महर्षि आर्ष्टिषेण के तपोवन पहुँचे और अपने वनवास का पाँचवाँ वर्ष व्यतीत किया।