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Mahabharata Part 3 : Vanaparva
Mahabharata Part 3 : Vanaparva
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय 2wcDjyK0IW7lDGG77tp8
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यमुना और पयोष्णी के तटों से आगे बढ़ते हुए पाण्डव वितस्ता, जला और उपजला नदियों के संगम पर पहुँचे। वहाँ महर्षि लोमश ने धर्मराज युधिष्ठिर को राजा उशीनर के त्याग और शरणागत-रक्षा की पावन कथा सुनाई। लोमशजी ने बताया कि पूर्वकाल में राजा उशीनर की धर्मनिष्ठा की परीक्षा लेने के लिए देवराज इन्द्र ने एक बाज (श्येन) का और अग्निदेव ने एक कबूतर (कपोत) का रूप धारण किया। जब राजा उशीनर अपनी यज्ञशाला में बैठे थे, तब वह भयभीत कबूतर उड़कर सीधे राजा की गोद में आ गिरा और अपनी रक्षा की याचना करने लगा।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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