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Mahabharata Part 3 : Vanaparva
Mahabharata Part 3 : Vanaparva
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय 61lSldAYcvxnPPAkRpsx
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भगवान शंकर और लोकपालों से दिव्य अस्त्र प्राप्त करने के पश्चात महाबली अर्जुन इन्द्रकील पर्वत पर देवराज इन्द्र के सारथि मातलि की प्रतीक्षा करने लगे। कुछ ही समय में आकाश को आलोकित करता हुआ इन्द्र का अत्यंत उज्ज्वल और दिव्य रथ वहाँ उतरा। उस रथ में दस हजार वायुगामी घोड़े जुते हुए थे और उस पर सुनहरी वैजयंती ध्वजा फहरा रही थी। मातलि ने रथ से उतरकर अर्जुन को प्रणाम किया और कहा कि देवराज इन्द्र आपसे मिलने के लिए अत्यंत उत्सुक हैं। अर्जुन ने गंगा में स्नान कर देवताओं और पितरों का तर्पण किया और फिर उस अलौकिक रथ पर आरूढ़ हुए।

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