श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय 9EykPpRUwtrdmXi4S0Il
1 / 17
वर्षाकाल समाप्त होते ही सुग्रीव ने माता सीता की खोज के लिए चारों दिशाओं में विशाल वानर सेनाएं भेजीं। दक्षिण दिशा में गए अंगद, जाम्बवान और पवनपुत्र हनुमान् जी को समुद्र तट पर गिद्धराज सम्पाती से ज्ञात हुआ कि सीताजी सौ योजन दूर लंका में अशोक वाटिका में हैं। वीर हनुमान् जी ने एक ही छलाँग में सौ योजन का अगाध समुद्र पार किया। उन्होंने लंका में प्रवेश कर अशोक वाटिका में पतिव्रता सीताजी के दर्शन किए। हनुमान् जी ने श्रीराम की दी हुई मुद्रिका (अंगूठी) सीताजी को सौंपी और लंका का दहन करके समुद्र पार लौट आए।
