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Mahabharata Part 3 : Vanaparva
Mahabharata Part 3 : Vanaparva
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय ArdhvN4pWjRS275q6hpa
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पाण्डवों के वनवास के बारह वर्ष पूर्ण होने को थे और तेरहवाँ वर्ष निकट आ रहा था। उस समय पाण्डवों के परम हितैषी देवराज इन्द्र ने विचार किया कि कर्ण के पास जन्मजात अभेद्य कवच और कुण्डल हैं, जिनके रहते युद्ध में अर्जुन उसे कभी परास्त नहीं कर सकेंगे। अतः इन्द्र ने ब्राह्मण का रूप धारण करके कर्ण से वे दोनों दिव्य कवच-कुण्डल भिक्षा में माँगने का गुप्त निश्चय किया। जब भगवान सूर्यदेव को इन्द्र के इस विचार का ज्ञान हुआ, तो वे अत्यंत चिंतित हो उठे।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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