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Mahabharata Part 3 : Vanaparva
Mahabharata Part 3 : Vanaparva
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय BVZrJY5afa1GniGW7TAZ
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गंधमादन पर्वत पर अर्जुन के साथ निवास करते हुए पाण्डवों ने अपने वनवास के चार वर्ष बड़े आनंद और तपस्या में व्यतीत किए। इस प्रकार वनवास के कुल दस वर्ष पूर्ण हो गए। ग्यारहवाँ वर्ष आरंभ होने पर पाण्डवों ने यक्षराज कुबेर के प्रदेश, राजर्षि वृषपर्वा और महर्षि आर्ष्टिषेण से विदा ली। घटोत्कच ने पुनः उपस्थित होकर सभी पाण्डवों, द्रौपदी और ब्राह्मणों को दुर्गम पर्वतों से नीचे उतारा और आशीर्वाद लेकर विदा हुआ। पाण्डव राजा सुबाहु के देश से होते हुए विशाखयूप पर्वत और चैत्ररथ वन में पहुँचे, जहाँ उन्होंने एक वर्ष बिताया।

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