श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय EYgm7fBWL5LAw4n3LKeN
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मेघनाद और कुम्भकर्ण के मारे जाने के उपरांत लंकापति रावण अपने स्वर्ण-मंडित दिव्य रथ पर सवार होकर प्रलयंकारी क्रोध में भरकर रणभूमि में उतरा। उसने अपनी बची हुई समस्त भयानक राक्षसी सेना के साथ वानर वाहिनी पर प्रलयंकारी धावा बोल दिया। रावण ने अपनी आसुरी माया से आकाश में श्रीराम और लक्ष्मण के अनेक नकली रूप प्रकट कर दिए। यह देखकर वानर सेना भ्रमित होने लगी, किंतु श्रीराम ने अपने दिव्य आग्नेयास्त्रों के प्रहार से उस संपूर्ण आसुरी माया को क्षण भर में नष्ट कर दिया।
