श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय FY3Tsk8YNFVBwKkjn4sB
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महाप्रलय और कलिधर्म की अद्भुत कथा सुनने के उपरांत धर्मराज युधिष्ठिर ने महर्षि मार्कण्डेय से करबद्ध निवेदन किया कि हे मुनिवर! कृपा करके हमें देवराज इन्द्र और दीर्घजीवी बक मुनि का पावन संवाद सुनाइए। इसके अतिरिक्त दान की महिमा, उत्तम पात्र का विचार और यमलोक के मार्ग का रहस्य भी विस्तार से बताइए। महर्षि मार्कण्डेय ने कहना आरंभ किया कि प्राचीन काल में देव-दानव युद्ध में विजय प्राप्त करने के पश्चात देवराज इन्द्र ऐरावत हाथी पर सवार होकर अपनी प्रजा को देखने निकले थे। पूर्व दिशा में समुद्र तट के समीप उन्होंने महर्षि बक का शांत आश्रम देखा।
