श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय IsqquZvZ6tCHJCYxAPAA
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अर्जुन के वियोग से दुखी पाण्डवों को सांत्वना देने हेतु देवर्षि नारद काम्यक वन पहुँचे। नारदजी ने पुलस्त्य-भीष्म संवाद के माध्यम से इन्द्रिय-संयम, सत्य और मन की शुद्धि को तीर्थ-फल का मूल आधार बताया।
