श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय L51svSsPRbDHEIkBMMkl
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काम्यक वन में निवास करते हुए एक दिन पाँचों पाण्डव पुरोहित धौम्य की आज्ञा से ब्राह्मणों के लिए कंद-मूल और फल एकत्र करने घने जंगल में गए हुए थे। आश्रम में केवल महारानी द्रौपदी, पुरोहित धौम्य और उनकी सेविका धात्रेयिका ही उपस्थित थीं। उसी समय सिन्धु और सौवीर देश का राजा जयद्रथ, जो राजा वृद्धक्षत्र का पुत्र था, विवाह की इच्छा से शाल्व देश की ओर जा रहा था। उसके साथ छह हजार रथ, हाथी, घोड़े और विशाल सेना थी। मार्ग में काम्यक वन से गुजरते समय जयद्रथ की दृष्टि आश्रम के द्वार पर कदम्ब की डाली पकड़े खड़ी रूपवती द्रौपदी पर पड़ी।
