श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 3 : Vanaparva • अध्याय LxPPnVA7WabxVyJz2BTf
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पाण्डव जब बदरिकाश्रम के रमणीय वातावरण में निवास कर रहे थे, तब एक दिन ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) से बहने वाली सुगंधित वायु के साथ एक अलौकिक सहस्त्रदल कमल उड़कर द्रौपदी के चरणों के समीप आ गिरा। उस कमल का नाम 'सौगंधिक' था। उसका रंग स्वर्णिम था, पंखुड़ियाँ सूर्य के समान देदीप्यमान थीं और उसकी सुगंध इतनी दिव्य थी कि उससे संपूर्ण तपोवन महक उठा। उस अनुपम पुष्प को देखकर महारानी द्रौपदी का मन अत्यंत मुग्ध और प्रफुल्लित हो उठा।
