कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 15 • कथा G1sPa83EzRQuPt7fndwj
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एक समय की बात है, एक गाँव में एक गरीब वृद्धा रहती थी। वह भगवान राम और हनुमान जी की परम भक्त थी। उसकी दिनचर्या का एक ही नियम था—रोजाना खिचड़ी बनाना और उसका भोग सबसे पहले हनुमान जी को लगाना। वह मन ही मन प्रार्थना करती, "हे बजरंगबली! आओ और मेरी खिचड़ी का भोग स्वीकार करो। " एक दिन हनुमान जी के मन में विचार आया कि अपनी इस भक्त की परीक्षा ली जाए। उन्होंने एक छोटे, धूल से सने और भूखे बालक का रूप धारण किया और उस बुढ़िया की कुटिया के बाहर जाकर बैठ गए। जब बुढ़िया खिचड़ी लेकर भोग लगाने बैठी, तो बालक ने धीमे स्वर में कहा, "माँ, बहुत भूख लगी है, क्या कुछ खाने को मिलेगा?
