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पौराणिक कथाएँ 15
पौराणिक कथाएँ 15
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 15 • कथा VIP0zHn7JiYqhxHMUIcu
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जनमेजय अर्जुन के पौत्र राजा परीक्षित के पुत्र थे। जनमेजय की पत्नी वपुष्टमा थी, जो काशीराज की पुत्री थी। बड़े होने पर जब जनमेजय ने पिता परीक्षित की मृत्यु का कारण सर्पदंश जाना तो उसने तक्षक से बदला लेने का उपाय सोचा। जनमेजय ने सर्पों के संहार के लिए सर्पसत्र नामक महान यज्ञ का आयोजन किया। नागों को इस यज्ञ में भस्म होने का शाप उनकी मां कद्रू ने दिया था। नागगण अत्यंत त्रस्त थे। समुद्र मंथन में रस्सी के रूप में काम करने के उपरान्त वासुकी ने सुअवसर पाकर अपने त्रास की गाथा ब्रह्मा से कही। उन्होंने कहा कि ऋषि जरत्कारू का पुत्र धर्मात्मा आस्तीक सर्पों की रक्षा करेगा, दुरात्मा सर्पों का नाश उस यज्ञ में अवश्यंभावी है। अत: वासुकि ने एलायत्र नामक नाग की प्रेरणा से अपनी वहन जरत्कारू का विवाह ब्राह्मण जरत्कारू से कर दिया था। उनके पुत्र का नाम 'आस्तीक' रखा गया। ब्राह्मण काल के अंत में उत्पन्न कुरु वंश के राजा जनमेजय को अनेक अश्वों का स्वामी बताया गया है। आसंदीवत्र उसकी राजधानी थी। पापमुक्त होने के लिए उसके पौत्रों ने अश्वमेध यज्ञ किया था। शौनक ऋषि इस यज्ञ के पुरोहित थे। वैदिक साहित्य में अनेक जनमेजयों का उल्लेख मिलता है। इनमें प्रमुख जनमेजय कुरु वंश का राजा था। महाभारत युद्ध में अर्जुनपुत्र अभिमन्यु जिस समय मारा गया, उसकी पत्नी उत्तरा गर्भवती थी। उसके गर्भ में राजा परीक्षित का जन्म हुआ जो युद्ध के बाद हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठा। जनमेजय इसी परीक्षित का पुत्र था। उपलब्ध विवरण के अनुसार एक बार परीक्षित ने शिकार खेलते समय एक मौन ध्यानस्थ ऋषि शमीक से पानी मांगा। मौन साधना के कारण कोई उत्तर न पाकर क्रुद्ध राजा ने उन्हें ढोंगी समझा और एक मरा हुआ सर्प उनके गले में डाल दिया। ऋषि शमीक के पुत्र श्रृंगी ऋषि को इसका पता चला तो उसने शाप दे दिया जिससे सातवें दिन तक्षक सर्प के काटने से राजा परीक्षित की मृत्यु हो गई। इसी का बदला लेने के लिए जनमेजय ने पहले तक्षशिला को जीता, फिर नाग-यज्ञ किया जिसमें सर्प यज्ञकुंड में पड़ कर मरने लगे। राजा परिक्षित् एक बार शिकार खेलने जाकर एक ऋषि का अपराध कर बैठे। इसके फल-स्वरूप उन्हें साँप से डसे जाकर मरने का शाप मिला। शाप का हाल सुनकर काश्यप नामक एक सर्प-विष-चिकित्सक (ओझा) राजा से मिलने को चला। उसने सोचा कि राजा को साँप के डँसते ही, मैं मंत्र और ओषधि के द्वारा चंगा करके मालामाल हो जाऊँगा। रास्ते में उससे तक्षक की भेंट हो गई।

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