कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 15 • कथा pGPJFid1SSxO7vXFJRJW
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गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन की यह घटना अत्यंत अद्भुत और प्रेरणादायक है। यह कथा हमें यह महान सत्य सिखाती है कि जब मनुष्य सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर पूर्ण श्रद्धा और समर्पण भाव से ईश्वर की शरण ले लेता है, तब स्वयं भगवान को भी उसके समीप आना पड़ता है। कहानी: गोस्वामी तुलसीदास जी काशी (वाराणसी) में निवास करते हुए रामचरितमानस की रचना में लीन थे। उनकी कीर्ति दिन-प्रतिदिन चारों दिशाओं में फैल रही थी। वे प्रतिदिन गंगा स्नान के उपरांत शेष बचे पवित्र जल को एक पुराने, सूखे वृक्ष की जड़ों में अर्पित कर दिया करते थे। 1. प्रेत का प्रकट होना उस वृक्ष पर एक प्रेत का वास था। तुलसीदास जी द्वारा प्रतिदिन जल अर्पित किए जाने से वह तृप्त हो गया।
