कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 1 • कथा P6PpQbJd0apwuvLHejQj
1 / 4
द्रोपदी यमुना स्नान के लिए गई । नहाते समय उसकी दृष्टि कुछ दूर स्नान करते एक साधु पर पड़ी। उनके शरीर पर केवल एक लंगोटी मात्र थी। दूसरी लंगोटी बदलने के लिए किनारे पर रखी थी। पर हवा का झोंका आया और वह दूसरी लंगोटी उड़कर पानी में बह गई। दुर्भाग्य से भीगी हुई लंगोटी भी पुराने होने के कारण उसी समय फट गई । तन ढकने में भी अड़चन खड़ी हो गई । प्रकाश फैलने लगा था। स्नान करने वालों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। साधु का असमंजस बढ़ा। वह निर्लज्ज बनकर कैसे खड़ा रहे? उसने कुछ दूर पर उगी एक छोटी सी झाड़ी के नीचे अपने को छिपा लिया। जब रात हो जाए तब अंधेरे में अपने स्थान पर जाने का उसका इरादा था।
