यह कहानी उस हठी बालक की है जिसका भगवान में बिल्कुल विश्वास न था | इस छोटी सी उम्र में बच्चे को नास्तिक होते देख उसके पिता ने किसी विद्वान् पंडित से इस विषय पर चर्चा करते हुए उनसे आग्रह किया कि वे बच्चे के मुख से किसी तरह भगवान का नाम बुलवाएं | पिता के आग्रह पर पंडित जी ने उनके घर पर पाठ-पूजा का आयोजन किया | पूरे 3 दिनों तक घर पर पूजा होती रही किन्तु बच्चे ने स्वयं को कमरे में बंद कर लिया और सबके बुलाने पर भी बाहर नहीं आया | पंडित जी ने पूजा-पाठ को संपन्न किया और घर पर ही बच्चे के बाहर आने का इन्तजार करने लगे, जैसे ही बच्चा अपने कमरे से बाहर आया पंडित जी ने बच्चे के हाथ की कलाई को जोर से पकड़ लिया | पंडित जी ने बच्चे की कलाई को इतनी जोर से पकड़ा जिससे बच्चे को असहनीय दर्द हुआ और बच्चे के मुख से अनायास ही – ” हे राम मुझे बचाए ” ये शब्द निकल गया | पंडित जी ने बच्चे का हाथ छोड़ते हुए बच्चे के पिता से कहा आपके बच्चे ने भगवान का नाम लेना सीख लिया है | इसी बीच बच्चे ने कहा आज तो मेरे मुख से यह नाम निकल गया है आज के बाद ऐसा कभी नहीं होगा |
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 9 • कथा 9nAbfycnVt98wb1ja9C3
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