कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 9 • कथा LjCfKNJ4tL4pwQ6P9d9S
1 / 4
एक बार एक बहुत बड़े संत अपने एक शिष्य के साथ दिल्ली से वृंदावन को वापिस जा रहे थे, रास्ते में उनकी कार ख़राब हो गई। वही पास में एक ढाबा था , शिष्य ने संत को वहाँ चल कर थोड़ा आराम करने का आग्रह किया, जबतक कार ठीक न हो जाए या कोई दूसरा इंतज़ाम न हो जाए। ढाबे के मालिक ने जब देखा की इतने बड़े संत उसके ढाबे पर आए हैं, उसने जल्दी- जल्दी शुद्ध सात्विक भोजन तैयार करवाया और संत से आग्रह किया की कृपा कर आप भोजन ग्रहण करे। संत ने बड़े ही विनम्र भाव से कहा कि वो सिर्फ़ भोग लगा हुआ प्रसाद ही पाते हैं। ढाबे का मालिक बहुत निराश हुआ और शिष्य भी दुःखी था की संत ने सुबह से कुछ खाया नहीं है।
