श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 5 : Sundarkand • अध्याय 85aeI4eTsGOyrcN5uYj5
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प्रस्रवण पर्वत के रमणीय शिखर पर विराजमान भगवान् श्रीराम, लक्ष्मण और वानरराज सुग्रीव के सम्मुख युवराज अंगद के नेतृत्व में समस्त वानर दल उपस्थित हुआ। वानर वीरों ने दोनों हाथ जोड़कर मस्तक झुकाया और संक्षेप में निवेदन किया कि माता सीता लंका में सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि जानकी जी का मन निरंतर श्रीराम के ही चिंतन में लीन रहता है। यह सुनकर भगवान् श्रीराम ने व्याकुल होकर पूछा कि मेरी प्रियतमा सीता कहाँ हैं और उनकी क्या दशा है?
