श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 5 : Sundarkand • अध्याय DaiVwLzJgTc1Gm5QXRvk
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महाबली पवनपुत्र हनुमान जी ने रावण के विशाल राजभवन के मध्यभाग में स्थित दिव्य पुष्पक विमान को पुनः विस्मयभरी दृष्टि से देखा। वह विमान मणियों और बहुमूल्य रत्नों से जड़ा हुआ था तथा उसके सोने के झरोखे अत्यंत मनोहर प्रतीत हो रहे थे। साक्षात शिल्पकार विश्वकर्मा ने अपनी संपूर्ण कला उड़ेलकर उस अलौकिक विमान का निर्माण किया था। जब वह आकाश मार्ग में उड़ता था, तो ऐसा लगता था मानो सूर्य के मार्ग पर कोई देदीप्यमान तारा चमक रहा हो।
