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Ramayana Part 5 : Sundarkand
Ramayana Part 5 : Sundarkand
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 5 : Sundarkand • अध्याय LAtBluti4xHXfIJps7qP
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चूड़ामणि सौंपने के उपरांत माता सीता ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से पवनपुत्र हनुमान जी को विदा देते हुए कहा कि यह दिव्य मणि श्रीराम, मेरी माता और महाराज दशरथ तीनों के पावन स्मरण का प्रतीक है। उन्होंने हनुमान जी से अनुरोध किया कि वे प्रभु श्रीराम को उनके समस्त कष्टों से अवगत कराएं और उन्हें शीघ्र आने के लिए प्रेरित करें। जानकी जी ने शंका प्रकट की कि इस अगाध समुद्र को लाँघना केवल तुम्हारे, गरुड़ अथवा वायुदेव के लिए ही संभव है, फिर वानर सेना और दोनों सुकुमार राजकुमार इसे कैसे पार करेंगे? अतः तुम ऐसा उपाय करो जिससे श्रीराम का पौरुष संसार में प्रकाशित हो सके।

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