श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 5 : Sundarkand • अध्याय bZk5hoyy7JpO3PkBKr1N
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अक्षयकुमार के वध का समाचार सुनकर लंकापति रावण अत्यंत व्याकुल और क्रुद्ध हो उठा। उसने अपने ज्येष्ठ और परम प्रतापी पुत्र इन्द्रजित् को बुलाया। रावण ने कहा कि हे वीर! तुमने कठोर तपस्या करके साक्षात ब्रह्मा जी से अमोघ दिव्यास्त्र प्राप्त किए हैं। बड़े-बड़े देवता और असुर भी समरांगण में तुम्हारे सामने ठहरने का साहस नहीं कर सकते। उस वानर ने हमारे समस्त वीर सेनापतियों और तुम्हारे अनुज अक्षयकुमार को मार गिराया है। तुम अपनी पूरी सावधानी और अस्त्र-बल के साथ जाकर उस असाधारण प्राणी पर विजय प्राप्त करो।
