Skip to main content
Verse 1 of 20
Aa
Ramayana Part 5 : Sundarkand
Ramayana Part 5 : Sundarkand
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 5 : Sundarkand • अध्याय cMclaFNgGcOgGaEVfw15
1 / 20

महेन्द्रगिरि पर्वत पर जाम्बवान् के नीतिपूर्ण परामर्श को स्वीकार करके समस्त वानर वीर अपार उत्साह से भर उठे। उन्होंने पवनपुत्र हनुमान जी को आगे किया और आकाश मार्ग से किष्किन्धा की ओर तीव्र गति से प्रस्थान किया। मार्ग में उड़ते हुए वे मतवाले हाथियों और पर्वतों के समान विशाल प्रतीत हो रहे थे। आकाश में स्थित सिद्ध, चारण और देवगण महाबली हनुमान जी के पराक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे थे। अपने स्वामी श्रीराम के कार्य को सिद्ध कर लेने के कारण उन सभी वानरों का हृदय अनिर्वचनीय आनंद और आत्मविश्वास से परिपूर्ण था।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
1 / 20