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पौराणिक कथाएँ 11
पौराणिक कथाएँ 11
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 11 • कथा Dc6q0CjZBe5fXS2WFumi
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गोकुल की पवित्र भूमि में एक मोर रहता था। वह प्रतिदिन भगवान श्रीकृष्ण के द्वार पर बैठता और अपनी मधुर वाणी में एक ही भजन गाता था: "मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे, गोपाल सांवरिया मेरे..." रोज आते-जाते भगवान के कानों में उस मोर का स्वर पड़ता था। प्रभु उसे देखते, एक मंद मुस्कान देते और आगे बढ़ जाते। मोर को पूर्ण विश्वास था कि कभी तो उसकी भक्ति पर प्रभु का विशेष स्नेह बरसेगा। इसी आस में एक पूरा वर्ष बीत गया। मोर सर्दी-गर्मी सहकर गाता रहा, प्रभु सुनते रहे, पर उन्होंने कभी उसे विशेष महत्त्व नहीं दिया। जब एक वर्ष की अनन्य भक्ति के बाद भी कोई विशेष कृपा नहीं हुई, तो मोर का धैर्य टूट गया। वह विलाप करने लगा। ठीक उसी समय वहाँ से एक मैना उड़ रही थी। श्रीकृष्ण के द्वार पर किसी को रोता देख उसे घोर आश्चर्य हुआ। आश्चर्य इस बात का नहीं था कि कोई मोर रो रहा है, अचंभा तो इस बात का था कि कोई उस प्रभु के द्वार पर रो रहा है जहाँ संसार के सारे कष्ट स्वतः ही मिट जाते हैं। मैना मोर के पास आई और पूछा, "हे मित्र, तुम यहाँ क्यों रो रहे हो?

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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