कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 11 • कथा Yb3CCCFW8lLWmzE7et3q
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बाबा बृज में जे सोचके आयो थो कि एकांत में रहकर फक्कड़ बाबा जी की तरह भजन करूँगो। परन्तु यहाँ आकर जे नन्द को पूत ऐसो पीछे पड़ो कि बाबा ने वाके ताइ ग्रहस्थ की तरिया सामान बटोरनो शुरू कर दियो। कल बोलयो :-बाबा भोर में बेसन को हलवो पानो है। बाबा ने जैसे तैसे मधुकरी करके सामग्री एकत्रित की और देसी गाय के शुद्ध धी में मेवा आदि डाल कर हलवो तैयार कियो।
