कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 11 • कथा cMWwWhQAF4BrP8M8Gx9M
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वेदवती की कहानी रामायण के उत्तर कांड में वर्णित है। वे माँ सीता का पूर्व जन्म मानी जाती हैं। उनकी कहानी त्याग, तपस्या और प्रतिशोध की एक अद्भुत गाथा है। 1. जन्म और पृष्ठभूमि वेदवती ब्रह्मर्षि कुशध्वज की पुत्री थीं। उनका नाम 'वेदवती' इसलिए पड़ा क्योंकि वे जन्म के समय ही वेदों का पाठ कर रही थीं। उनके पिता चाहते थे कि उनकी पुत्री का विवाह केवल भगवान विष्णु से हो, क्योंकि वे उन्हें ही साक्षात लक्ष्मी का रूप मानते थे। 2. कठोर तपस्या वेदवती के पिता की हत्या एक दैत्य (शंभु) ने कर दी थी। अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए, वेदवती ने सांसारिक मोह त्याग दिया और भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए हिमालय में घोर तपस्या करने लगीं।
