कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 53 • कथा 5GMIKUpAewOBYleCzEvY
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मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास और सिसोदिया राजवंश की रग-रग में बाण माता का नाम रचा-बसा है। बाण माता को मेवाड़ के राजाओं की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। उनकी कहानी वीरता, भक्ति और चित्तौड़गढ़ के स्वाभिमान से जुड़ी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, बाण माता को मां चामुंडा का ही एक स्वरूप माना जाता है। 'बाण' शब्द का अर्थ तीर होता है। कहा जाता है कि देवी ने दुष्टों के संहार के लिए बाणों की वर्षा की थी, जिसके कारण उनका नाम 'बाण माता' पड़ा। माना जाता है कि शुरुआत में बाण माता की पूजा गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र (गिरनार के पास) में होती थी।
