श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 14 : Ashvamedhikaparva • अध्याय 4SmviWlcQqxgTKMibwFi
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हस्तिनापुर की सुवर्णमयी पावन यज्ञभूमि में महर्षि वेदव्यास, पैल और याज्ञवल्क्य जैसे प्रकांड ऋत्विजों ने चैत्र पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त में धर्मराज युधिष्ठिर को अश्वमेध यज्ञ की पावन दीक्षा दी। महर्षि व्यास ने कहा कि हे कुन्तीनन्दन, आज से इस महायज्ञ का शुभारंभ हो रहा है। यह यज्ञ सभी अंगों से परिपूर्ण होने के कारण 'अहीन' और विपुल सुवर्ण के प्रयोग से 'बहुसुवर्णक' कहलाएगा। इस अनुष्ठान के पूर्ण होने से आप समस्त पापों से मुक्त होकर देवराज इंद्र के समान परम पवित्र हो जाएंगे।
