श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 14 : Ashvamedhikaparva • अध्याय HZ800jPnq5TQ5k77Vmh6
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धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से धर्म और शौच (आंतरिक व बाह्य शुचिता) के यथार्थ लक्षणों के विषय में पूछा। श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया कि अहिंसा, शुचिता, अक्रोध, क्रूरता का अभाव, इंद्रिय-निग्रह, दया और क्षमा ही धर्म के सनातन लक्षण हैं। मन, वाणी और कर्म से किसी को कष्ट न पहुंचाना ही बाह्य और आंतरिक शौच है। जो मनुष्य युवावस्था में विद्याध्ययन, गृहस्थ में न्यायपूर्ण आचरण और वृद्धावस्था में संन्यास का आश्रय लेता है, वह धर्म के मार्ग पर निष्कलंक होकर चलता है।
