श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 7 : Dronaparva • अध्याय 0RzFixNKh9rlt4ZVcw3L
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चौदहवें दिन के प्रभात काल में हस्तिनापुर के राजमहल में महाराज धृतराष्ट्र अत्यंत व्याकुल होकर विलाप कर रहे थे। धृतराष्ट्र ने कहा कि अर्जुन की प्रतिज्ञा कभी निष्फल नहीं होती, अतः आज जयद्रथ और कौरवों का सर्वनाश निश्चित है। इस पर संजय ने राजा को फटकारते हुए स्पष्ट कहा कि इस प्रलयंकारी युद्ध के मूल कारण केवल धृतराष्ट्र का पुत्र-मोह और लोभ ही है। संजय ने स्मरण कराया कि जब विदुर, भीष्म और स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने संधि का प्रस्ताव रखा था, तब धृतराष्ट्र ने उनकी एक न सुनी।
