श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 7 : Dronaparva • अध्याय 2ZQ8ncBoWemMgymEgmHf
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चक्रव्यूह के अभेद्य घेरे के भीतर जब वीर अभिमन्यु अकेला छूट गया, तब भी उसके मुखमंडल पर तनिक भी भय अथवा चिंता की रेखा नहीं थी। अर्जुन के इस सोलह वर्षीय सुपुत्र ने अपने गांडीव-समान धनुष पर तीक्ष्ण बाणों का संधान करके कौरव वाहिनी में प्रलय मचाना आरंभ कर दिया। उसने अकेले ही कर्ण, दुःशासन, शल्य और अश्वत्थामा के प्रहारों को निष्फल कर दिया। अभिमन्यु के बाणों की गति इतनी तीव्र थी कि संपूर्ण दिशाओं में केवल उसकी प्रत्यंचा की गूंज ही सुनाई दे रही थी।
