श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 7 : Dronaparva • अध्याय 4sOalBl4RBWEUXmCcUfM
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कौरवों के शकटव्यूह के मुहाने पर अजेय आचार्य द्रोण ने पांडव सेना पर ऐसा प्रलयंकारी आक्रमण किया कि चारों ओर हाहाकार मच गया। पचासी वर्ष की वृद्धावस्था में भी द्रोणाचार्य सोलह वर्ष के तेजस्वी युवक की भांति चपलता से दिव्यास्त्रों का प्रयोग कर रहे थे। उन्होंने अपने तीक्ष्ण बाणों से केकयराज बृहत्क्षत्र, चेदिराज धृष्टकेतु, उनके वीर पुत्र और मगध नरेश के पुत्र को क्षणभर में यमलोक भेज दिया। द्रोण के इस संहारक रूप को देखकर पांडव सेना के पैर उखड़ गए।
