श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 7 : Dronaparva • अध्याय H3obZ8qUS1BBDZCo5Cte
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चौदहवें दिन की आधी रात के समय आचार्य द्रोण और महाधनुर्धर कर्ण ने मिलकर पांडव सेना पर ऐसा प्रलयंकारी आक्रमण किया कि चारों ओर घोर चीत्कार मच गई। कर्ण के तीक्ष्ण बाणों की मार से पांडवों के रथी, गजारोही और पैदल सैनिक मशालें फेंककर भागने लगे। धर्मराज युधिष्ठिर अपनी सेना की यह दुर्दशा देखकर अत्यंत व्याकुल हो उठे। युधिष्ठिर ने अर्जुन से कहा कि इस समय केवल वे ही कर्ण के इस भयानक संहार को रोक सकते हैं।
