श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 7 : Dronaparva • अध्याय HnsT13xHvIMLtY4nJRnz
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महासमर के बारहवें दिन प्राग्ज्योतिषपुर के वृद्ध और महाप्रतापी राजा भगदत्त ने अपने ऐरावत-समान विशाल गजराज सुप्रतीक पर सवार होकर पांडव सेना पर भीषण आक्रमण कर दिया। सुप्रतीक कोई साधारण हाथी नहीं था, उसमें दस सहस्र मतवाले हाथियों का असीम बल था। उसके पैरों की धमक से पृथ्वी थरथराने लगी और उसकी चिंघाड़ से पांडव सैनिकों के कलेजे कांप उठे। भगदत्त ने अपने बाणों की वर्षा करते हुए सैकड़ों रथों और पैदल सैनिकों को एक साथ कुचलना आरंभ कर दिया।
