श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 13 : Anushasanaparva • अध्याय 73Ap84hotSd6WIY8AS4E
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धर्मराज युधिष्ठिर ने शरशैया पर आसीन पितामह भीष्म के सम्मुख विनीत भाव से मस्तक झुकाकर एक अत्यंत पावन जिज्ञासा प्रकट की। हे पितामह! राजा कुशिक का वंश तो विशुद्ध क्षत्रिय कुल था, फिर उस वंश में आगे चलकर महान ब्रह्मर्षि विश्वामित्र का प्रादुर्भाव कैसे हुआ? किस प्रकार महर्षि च्यवन ने राजा कुशिक और उनकी महारानी के असीम धैर्य की परीक्षा ली थी? कृपया मुझे यह पावन इतिहास विस्तारपूर्वक सुनाइए।
