श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 13 : Anushasanaparva • अध्याय DkQqbFY6vAkCYc8O9Kcc
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धर्मराज युधिष्ठिर ने शरशैया पर आसीन पितामह भीष्म के सम्मुख हाथ जोड़कर एक अत्यंत महत्वपूर्ण दार्शनिक प्रश्न प्रस्तुत किया। हे पितामह! संसार में दैव अर्थात भाग्य और पुरुषार्थ अर्थात मनुष्य के अपने कर्म-प्रयत्न में से किसे श्रेष्ठ माना गया है? क्या मनुष्य केवल भाग्य के भरोसे बैठकर सब कुछ प्राप्त कर सकता है, अथवा उसके अपने कर्म ही उसके भविष्य का निर्माण करते हैं? कृपया इस संशय का निवारण कीजिए।
