श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 13 : Anushasanaparva • अध्याय mhlDhRe91bN6NzLO2bgt
1 / 23
धर्मराज युधिष्ठिर ने शरशैया पर आसीन पितामह भीष्म के सम्मुख विनीत भाव से मस्तक झुकाकर एक अत्यंत दुर्लभ प्रश्न पूछा। हे पितामह! आपने पूर्व में बताया था कि क्षत्रिय के लिए ब्राह्मणत्व प्राप्त करना अत्यंत दुष्कर है। किंतु मैंने सुना है कि विश्वामित्र जी के अतिरिक्त पूर्वकाल में प्रतापी राजा वीतहव्य ने भी क्षत्रिय होते हुए ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया था। कृपया मुझे बताइए कि राजा वीतहव्य को किस प्रकार यह सिद्धि प्राप्त हुई थी?
